श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  2.1.128 
कीदृशो जगद्-ईशो ’सौ
कदा वा दृश्यतां मया
तद्-एक-लालसो हित्वा
गृहादीन् जाह्नवीम् अगाम्
 
 
अनुवाद
मैं यह जानने के लिए उत्सुक हो गया कि यह ब्रह्माण्ड का स्वामी कौन है और मैं कब उसके दर्शन कर पाऊँगा। इसी आकांक्षा को लेकर मैंने अपना घर-बार और अन्य मोह-माया त्याग दी और गंगा तट पर चला गया।
 
I became curious to know who the Lord of the Universe was and when I would be able to see Him. With this desire in mind, I abandoned my home and other attachments and went to the banks of the Ganges.
तात्पर्य
इस ब्रह्मांड के स्वामी को पहचानना चाहते हुए गोपा-कुमार ने उनकी तुलना परिचित लोगों और चीजों से की। परंतु जिस स्थान पर उनका पालन-पोषण हुआ था, वहाँ उन्हें कोई सुराग नहीं मिला, इसलिए वे भगवान की तलाश में भटकने के लिए घर से निकल गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)