श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  2.1.117 
कौतुकेन वयं बाला
यामो ’मुं वीक्षितुं सदा
स तु गोप-कुमारान् नो
लब्ध्वा नमति भक्तितः
 
 
अनुवाद
हम ग्वाल-बाल कौतूहलवश अक्सर उसे देखने चले आते थे, लेकिन जब वह हमें अपने सामने देखता, तो श्रद्धा से हमें प्रणाम करता।
 
We cowherd boys often came to see him out of curiosity, but whenever he saw us in front of him, he would bow to us with reverence.
तात्पर्य
उनके प्रति लड़कों द्वारा कोई विशेष सम्मान ना रखे जाने के बावजूद, उनके मन में लड़कों के प्रति बहुत सम्मान था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)