श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  2.1.115 
विक्रोशन्तं क्वचिद् भूमौ
स्खलन्तं क्वापि मत्त-वत्
लुठन्तं भुवि कुत्रापि
रुदन्तं क्वचिद् उच्चकैः
 
 
अनुवाद
कभी-कभी वह चिल्लाता, या जोर-जोर से सिसकियाँ लेता, या लड़खड़ाकर ज़मीन पर गिर जाता, या पागलों की तरह ज़मीन पर लोटता रहता।
 
Sometimes he would scream, or sob loudly, or stumble and fall to the ground, or roll on the ground like a madman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)