जैसे-जैसे यहाँ इतिहास खुलेगा, हम पाएँगे कि हालाँकि गोवर्धन में गोपा-कुमार के एक मासूम लड़के होने के बाद एक लंबा समय बीत चुका है, लेकिन वह अभी भी बूढ़े नहीं हुए हैं। जैसा कि वह बाद में बताते हैं, यह उनके आध्यात्मिक गुरु द्वारा उन्हें दिए गए आशीर्वाद के कारण था:
त्वं एतस्य प्रभावेण
चिर-जीवी भवान्व-अहम्
ईदृग-गोपार्भ-रूपश च
तत्-फलाप्त्य-अर्ह-मानसः
"इस मंत्र की शक्ति से, आप लंबे समय तक जीवित रहें, आप हमेशा एक ग्वाले लड़के का रूप रखें, और आप मंत्र के फल का स्वाद लेने के लिए सही मानसिकता विकसित करें।" (बृहद-भागवतामृत 2.1.191)
गोपा-कुमार की अपनी गायों के एक झुंड की देखभाल करने का मतलब है कि उनका परिवार अपेक्षाकृत संपन्न और स्वतंत्र था। इस काम को करते हुए, वह मथुरा-मंडल की बीस-योजना परिधि के क्षेत्र में घूमते रहे। गाय चराने के लिए जिन जगहों का उन्होंने इस्तेमाल किया, उनमें से उनके विशेष पसंदीदा गोवर्धन, वृंदावन का जंगल और यमुना के किनारे थे। कभी-कभी वह धाम में अन्य स्थानों पर जाते थे, जैसे महावन, लेकिन एक पारलौकिक राय के अनुसार व्रज-भूमि में गोवर्धन, वृंदावन और यमुना के अलावा कुछ नहीं है, क्योंकि ये तीन स्थान पूरे धाम में व्याप्त हैं। किसी भी मामले में, व्रज-धाम के बाहर कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ एक ग्वाला को अपने व्यवसाय से वास्तविक लाभ मिल सके।
गोपा-कुमार अपने नए छात्र को "हे विद्वान ब्राह्मणों में सर्वश्रेष्ठ" कहकर संबोधित करते हैं क्योंकि छात्र मथुरा के ब्राह्मण समुदाय से आता है।
