श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  2.1.112 
तस्मिन् गोवर्धने कृष्णा-
तीरे वृन्दावने ’त्र च
माथुरे मण्डले बालैः
समं विप्र-वर स्थितः
 
 
अनुवाद
हे विद्वान ब्राह्मणों में श्रेष्ठ! मैं अन्य बालकों के साथ गोवर्धन में, यहाँ वृन्दावन में, यमुना के तट पर तथा मथुरा जिले के विभिन्न स्थानों पर रहा।
 
O best of learned brahmanas, I lived with other children in Govardhana, here in Vrindavan, on the banks of the Yamuna, and at various places in the Mathura district.
तात्पर्य
अब गोपा-कुमार अपनी कहानी शुरू करते हैं, जो छठवें अध्याय के अंत तक जारी रहेगी। उनका जन्म एक वैश्य समुदाय में, एक ग्वालों के परिवार में हुआ था। श्रीमद्-भागवतम (10.24.21) सहित कई शास्त्रों में वर्णन है कि वैश्य चार व्यवसायों में संलग्न हो सकते हैं: व्यापार, बैंकिंग, खेती और गौ-रक्षा (कृषि-वाणिज्य-गो-रक्षा कुसीदं च)।

जैसे-जैसे यहाँ इतिहास खुलेगा, हम पाएँगे कि हालाँकि गोवर्धन में गोपा-कुमार के एक मासूम लड़के होने के बाद एक लंबा समय बीत चुका है, लेकिन वह अभी भी बूढ़े नहीं हुए हैं। जैसा कि वह बाद में बताते हैं, यह उनके आध्यात्मिक गुरु द्वारा उन्हें दिए गए आशीर्वाद के कारण था:

त्वं एतस्य प्रभावेण

चिर-जीवी भवान्व-अहम्

ईदृग-गोपार्भ-रूपश च

तत्-फलाप्त्य-अर्ह-मानसः

"इस मंत्र की शक्ति से, आप लंबे समय तक जीवित रहें, आप हमेशा एक ग्वाले लड़के का रूप रखें, और आप मंत्र के फल का स्वाद लेने के लिए सही मानसिकता विकसित करें।" (बृहद-भागवतामृत 2.1.191)

गोपा-कुमार की अपनी गायों के एक झुंड की देखभाल करने का मतलब है कि उनका परिवार अपेक्षाकृत संपन्न और स्वतंत्र था। इस काम को करते हुए, वह मथुरा-मंडल की बीस-योजना परिधि के क्षेत्र में घूमते रहे। गाय चराने के लिए जिन जगहों का उन्होंने इस्तेमाल किया, उनमें से उनके विशेष पसंदीदा गोवर्धन, वृंदावन का जंगल और यमुना के किनारे थे। कभी-कभी वह धाम में अन्य स्थानों पर जाते थे, जैसे महावन, लेकिन एक पारलौकिक राय के अनुसार व्रज-भूमि में गोवर्धन, वृंदावन और यमुना के अलावा कुछ नहीं है, क्योंकि ये तीन स्थान पूरे धाम में व्याप्त हैं। किसी भी मामले में, व्रज-धाम के बाहर कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ एक ग्वाला को अपने व्यवसाय से वास्तविक लाभ मिल सके।

गोपा-कुमार अपने नए छात्र को "हे विद्वान ब्राह्मणों में सर्वश्रेष्ठ" कहकर संबोधित करते हैं क्योंकि छात्र मथुरा के ब्राह्मण समुदाय से आता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)