धर्मार्थ-काम-मोक्षांणां
उपदेश-समन्वितम्
पूर्व-वृत्त-कथा-युक्तम्
इतिहासं प्रचक्षते
"वह ग्रंथ जिसमें पूर्व की घटनाओं का वर्णन होता है और धार्मिकता, आर्थिक विकास, इंद्रिय तृप्ति और मुक्ति के बारे में उपदेश शामिल होते हैं, उसे इतिहास कहा जाता है।"
हालांकि, गोपा-कुमार की योजना अपने स्वयं के इतिहास को बताने की है। सत्य की स्थापना के लिए सभी प्रकार के साक्ष्यों में से स्वयं के जीवन का अनुभव सबसे मजबूत होता है। इस प्रकार जब गोपा-कुमार अपने जीवन की घटनाओं को स्पष्ट रूप से प्रकट करते हैं, तो ब्राह्मण को गोपा-कुमार द्वारा ग्रहण किए गए उच्च सत्य के लिए राजी किया जाना चाहिए।
कई मौकों पर गोपा-कुमार आसपास क्या हो रहा है इससे अनजान थे क्योंकि भगवान के प्रति उनके प्रेम के अतिप्रवाह ने उनकी बाहरी धारणा को परेशान कर दिया था। फिर भी, अपने उन्नत आत्म-साक्षात्कार के आधार पर वह अब उन घटनाओं के विवरण को भी याद कर सकते हैं जिनके बारे में वह घटने पर बेहोश थे। इनमें से कई व्यक्तिगत घटनाएं भी सार्वजनिक रूप से स्वतंत्र रूप से चर्चा करने के लिए बहुत गोपनीय हैं, और गोपा-कुमार का उनका उल्लेख करने में कुछ शर्मिंदगी हो सकती है। हालाँकि, वह ब्राह्मण को प्रबुद्ध करने में मदद करने के लिए वह सब कुछ करने के लिए बाध्य महसूस करते हैं जो वह कर सकते हैं। जैसा कि गोपा-कुमार इस पुस्तक के अंतिम अध्याय में ब्राह्मण को बताएंगे:
पश्य यच्चात्मनस्तस्य
तदीयानां अपि ध्रुवम्
वृत्तं परम-गोप्यं तत्
सर्वं ते कथितं मया
"बस देखो। मैंने तुम्हें वह सब कुछ बता दिया है जो मेरे साथ हुआ, और भगवान और उनके भक्तों के द्वारा किया गया सब कुछ, यहाँ तक कि वह भी जो अत्यंत गोपनीय है।।" (बृहद-भागवतामृत 2.7.4)
