श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  2.1.107 
इति बोधयितुं चास्य
सर्व-संशय-नोदनम्
स्व-वृत्तम् एव निखिलं
नूनं प्राक् प्रतिपादये
 
 
अनुवाद
उसे इस बात का एहसास दिलाने के लिए, पहले मुझे उसे अपना पूरा इतिहास बताना होगा। इससे उसके सारे संदेह दूर हो जाएँगे।
 
To convince him of this, I must first tell him my entire history. This will clear up any doubts he might have.
तात्पर्य
ब्राह्मण को यह बताना होगा कि कृष्ण उनके प्रयासों का लक्ष्य हैं और नामा-संगकीर्तन कृष्ण को प्राप्त करने का साधन है। लेकिन अगर गोपा-कुमार शुरू से ही यह कह देते हैं, तो ब्राह्मण, जिनका दिमाग शंकाओं और गलतफहमियों से भरा है, शायद सलाह का पूरा महत्व समझ न पाएँ। इसलिए, ब्राह्मण का भरोसा जीतने के लिए, गोपा-कुमार को पहले अपने अनुभवों का वर्णन करने की ज़रूरत है, जब से उन्हें गोपाल-मंत्र मिला और वर्तमान क्षण तक। इससे ब्राह्मण की शंकाएँ और गलत विचार दूर हो जाएँगे। यह ब्राह्मण को श्री-भागवत-कथा का अमृत पीने की भी अनुमति देगा, जो उनके दिल को शुद्ध करेगा और आवश्यक पारलौकिक ज्ञान को आत्मसात करने के लिए पर्याप्त शुद्ध करेगा। वास्तव में, उस ज्ञान को स्वतः ही प्रकट होना चाहिए, बिना स्पष्ट रूप से बताए भी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)