श्री-परीक्षिद् उवाच
निशम्य सादरं तस्य
वचनं स व्यचिन्तयत्
एतस्य कृत-कृत्यस्य
जाता पूर्णार्थता किलव्
अनुवाद
श्री परीक्षित बोले: ब्राह्मण के वचनों को आदरपूर्वक सुनकर, युवा ग्वाले ने सोचा, "इस व्यक्ति ने वह सब कुछ कर लिया है जो उसे करना चाहिए था। वास्तव में, इसका जीवन पूर्णतः सफल है।"
Sri Parikshit said: Listening respectfully to the words of the Brahmin, the young cowherd thought, "This man has done everything he should have done. In fact, his life is a complete success."
तात्पर्य
आदर शब्द का सामान्यतः अर्थ 'सम्मान' लिया जाता है, किन्तु इसका अर्थ 'प्रेम' भी हो सकता है। मथुरा के ब्राह्मण होने के कारण उनके ब्राह्मण-पद के लिए सम्मान तथा श्री मदन-गोपाल के साथी उपासक होने के कारण उनके लिए विशेष आत्मीयता के कारण गोप-कुमार ने उनकी सारी बातें ध्यान से सुनीं। पद्य 102 से 108 तक गोप-कुमार की ब्राह्मण के प्रति विचारशील चिन्ता का वर्णन किया गया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥