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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार
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अध्याय 7: पूर्ण (उत्कृष्ट भक्तों का शिखर)
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श्लोक 85
श्लोक
1.7.85
ततो ’न्याभिश् च देवीभिर्
एतद् एवानुमोदितम्
सात्राजिती परं मान-
गेहं तद्-असहाविशत्
अनुवाद
[उद्धव ने कहा:] अन्य सभी रानियाँ सहमत हो गईं। केवल सत्यभामा, सत्राजिती, उन शब्दों को सहन न कर पाने के कारण क्रोध से अपने कक्ष में प्रवेश कर गईं।
[Uddhava said:] All the other queens agreed. Only Satyabhama, Satrajitti, unable to bear those words, entered her chamber in anger.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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