श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 7: पूर्ण (उत्कृष्ट भक्तों का शिखर)  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  1.7.58 
प्रतिष्ठितस् त्वयैवासौ
चक्रवर्ती युधिष्ठिरः
अनुशाल्वादि-दुष्टानां
बिभेति वर-विक्रमात्
 
 
अनुवाद
आपने युधिष्ठिर को सम्राट बना दिया है, किन्तु वह शाल्व के छोटे भाई तथा अन्य अत्यन्त शक्तिशाली दुष्टों से भयभीत हैं।
 
You have made Yudhishthira the emperor, but he is afraid of Shalva's younger brother and other very powerful evil people.
तात्पर्य
कृष्ण के उन्हें प्रोत्साहित ना करने पर युधिष्ठिर राजसूय यज्ञ आयोजन की चुनौती स्वीकार करने का साहस नहीं करेंगे, और कई विरोधी जैसे की राजा अनुशल्व को पहले रास्ते से हटाने की जरूरत है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)