श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 7: पूर्ण (उत्कृष्ट भक्तों का शिखर)  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.7.5 
संस्तभ्य यत्नाद् आत्मानं
स्वास्थ्यं जनयितुं प्रभोः
उपायं चिन्तयाम् आस
प्राप चानन्तरं हृदि
 
 
अनुवाद
बड़ी मुश्किल से ब्रह्मा ने खुद को संभाला और सोचने लगे कि अपने प्रभु को कैसे सामान्य किया जाए। जल्द ही उनके मन में एक विचार आया।
 
With great difficulty, Brahma composed himself and began to think about how to restore his Lord to normal. Soon, an idea came to his mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)