श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 7: पूर्ण (उत्कृष्ट भक्तों का शिखर)  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.7.48 
वृद्धा च मत्ता सह सत्यभामया
कामस्य वेगाद् अनुकुर्वती मुहुः
आलिङ्गनं चुम्बनम् अप्य् अधावद्
धर्तुं हरिं बाहु-युगं प्रसार्य
 
 
अनुवाद
वृद्धा पद्मावती भी मदमस्त हो उठीं। काम-वासना से प्रेरित होकर, उन्होंने और सत्यभामा ने कृष्ण को बार-बार गले लगाने और चूमने का अभिनय किया और उन्हें पकड़ने के लिए हाथ फैलाकर उनके पीछे दौड़ीं।
 
The elderly Padmavati also became intoxicated. Driven by lust, she and Satyabhama pretended to embrace and kiss Krishna repeatedly and ran after him, their arms outstretched to catch him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)