श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 7: पूर्ण (उत्कृष्ट भक्तों का शिखर)  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.7.45 
श्री-परीक्षिद् उवाच
इत्थं स-पुष्प-विक्षेपं
वदन् दृष्ट्वा दिशो ’खिलाः
तां स-चुम्बनम् आलिङ्ग्य
गो-गोपैः सङ्गतो ’ग्रतः
 
 
अनुवाद
श्री परीक्षित ने आगे कहा: यह कहकर, कृष्ण ने श्री राधा पर मुट्ठी भर फूल फेंके, चारों ओर देखा, फिर उन्हें गले लगाया और चूमा। फिर वे गायों और ग्वालबालों से मिलने के लिए आगे बढ़े।
 
Sri Parikshit continued: Having said this, Krishna threw a handful of flowers at Sri Radha, looked around, then embraced and kissed her. He then proceeded to meet the cows and cowherd boys.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)