इस परम उत्तम भगवान् के आख्यान की सहायता से, जो यह दर्शाता है कि भगवान् की कृपा का सार किसे प्राप्त हुआ है, मनुष्य उन्हें निश्चित रूप से समझ सकता है। जो कोई भी किसी भी कारण से, श्रद्धापूर्वक इस आख्यान का आश्रय लेता है, उसे शीघ्र ही भगवान् श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम प्राप्त हो जाता है।
With the help of this supremely excellent account of the Lord, which reveals who has attained the essence of His grace, one can certainly understand Him. Anyone who, for whatever reason, reverently resorts to this account will soon attain love for Lord Krishna.
तात्पर्य
परिक्षित के वचन में श्रील सनातन गोस्वामी ने अपना वचन भी जोड़ा। परम भगवान् के भक्तों की शरण लेने से उनकी विशेष महिमा को समझ सकते हैं, जिससे व्यक्ति विशेष प्रकार की भक्ति साधना में प्रवेश करता है और अंततः भगवान् के लिए शुद्ध प्रेम प्राप्त करता है। पूर्णता का यह क्रम अपने आप में ही आश्चर्यजनक है, लेकिन इससे भी अधिक आश्चर्यजनक यह है कि कोई भी व्यक्ति केवल विश्वास के साथ इस बृहद्-भागवतामृत को सुनकर भी पूर्णता प्राप्त कर सकता है। इस पुस्तक का उद्देश्य यह बताना है कि मूल रूप से भगवान् के व्यक्तित्व श्री कृष्णचंद्र किस प्रकार असीमित दया के स्रोत के रूप में कार्य करते हैं। निष्ठावान पाठक जल्दी से कृष्ण-प्रेम के लक्ष्य पर पहुँच जाएँगे, विशेष रूप से तब जब वे साधना-भक्ति के अधिकृत सिद्धांतों का ईमानदारी से पालन करते हैं।
इस प्रकार श्रील सनातन गोस्वामी के बृहद-भागवतामृत के भाग एक का सातवां अध्याय, “पूर्ण (उत्कृष्ट भक्तों का शिखर)”, समाप्त होता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥