श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 7: पूर्ण (उत्कृष्ट भक्तों का शिखर)  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  1.7.120 
भोजनार्थं च तेनैव
देवकी रोहिणी तथा
अन्न-पानादि-सहिते
तत्र शीघ्रं प्रवेशिते
 
 
अनुवाद
उद्धव ने देवकी और रोहिणी से भी आग्रह किया कि वे कृष्ण के भोजन के लिए भोजन और पेय लेकर शीघ्र आएँ।
 
Uddhava also requested Devaki and Rohini to come quickly with food and drinks for Krishna's meal.
तात्पर्य
कृष्ण के सबसे अंतरंग भक्त, भगवान की आज्ञाओं को उनकी अभिव्यक्ति के पहले ही जान लेते हैं। दोपहर का भोजन लाने से उद्धव ने बुद्धिमानी से पूरे माहौल को बदल दिया। इससे पहले, देवकी ने इस ज़रूरत को पहले ही भांप लिया था और वो रसोईघर चली गई थी। और हम समझ सकते हैं कि बलराम भी भावनात्मक तौर पर उछल-कूद भरे दृश्य से यह बहाना बनाकर निकल गए कि उन्हें स्नान के लिए जाना है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)