शुकदेव श्रीमद्-भागवतं महाभारत के उस महान वैष्णव परीक्षित को सुनाएँगे जो कि सबसे उपयुक्त श्रोता है, जिसे कृष्ण ने गर्भ में ही जीवनदान दे दिया था। महाभारत के कथन के अनुसार, अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र हथियार ने वास्तव में उत्तर का गर्भस्थ शिशु मार दिया था, लेकिन कृष्ण ने उत्तर के गर्भ में प्रवेश किया और परीक्षित को नया शरीर दिया। और परीक्षित कृष्ण-जीवित बन गए, इस अर्थ में कि न केवल कृष्ण ने उन्हें जीवनदान दिया बल्कि इसलिए भी क्योंकि उनके जीवन का हर पल कृष्ण को याद करने में समर्पित था। वे अपने गुरु शुकदेव की तरह एक परिपूर्ण वैष्णव थे और इसलिए शुकदेव उनसे सबसे गोपनीय रहस्य कह सकते थे। सबसे योग्य वक्ता और सबसे योग्य श्रोता के संयुक्त प्रयासों से, श्रीमद्-भागवतं कलियुग के इस अंधेरे युग में भी अपनी अलौकिक रोशनी बिखेर सकता है।
