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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार
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अध्याय 6: प्रियतम (सर्वाधिक प्रिय भक्त)
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श्लोक 35
श्लोक
1.6.35
अयम् एव हि किं तेषु
त्वत्-प्रभोः परमो महान्
अनुग्रह-प्रसादो यस्
तात्पर्येणोच्यते त्वया
अनुवाद
क्या यह तुम्हारे रब की उन पर सबसे बड़ी कृपा और दया है, जैसा कि तुम्हारे शब्दों से ज़ाहिर होता है?
Is this the greatest grace and mercy of your Lord upon them, as is evident from your words?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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