इस मामले में अगर नारद यह सुझाव देते हैं कि वह कुंती और उसके बेटों से यादवों के बारे में सुनकर ही पर्याप्त संतुष्टि प्राप्त कर सकते हैं, तो कुंती उसे याद दिलाती है कि वह पहले से ही द्वारका के निवासियों को पाण्डवों से बेहतर जानते हैं। चूंकि नारद कई बार द्वारका जा चुके हैं, तो कुंती उसे ऐसा क्या बता सकती है जो वह पहले से नहीं जानता? उसे बस द्वारका जाना चाहिए, जहाँ वह कृष्ण की पूरी दया देख सकता है।
