विपदः सन्तु ताः शश्वत्
तत्र तत्र जगद्-गुरो
भवतो दर्शनं यत् स्याद्
अ पुनर-भव-दर्शनम्
"मैं चाहती हूँ कि वे सभी आपदाएँ बार-बार घटित हों ताकि हम आपको बार-बार देख सकें, क्योंकि आपको देखने का अर्थ है कि हम जन्म और मृत्यु को बार-बार नहीं देखेंगे।" (भागवतम 1.8.25)
जिस भक्त ने कृष्ण के चरणकमलों को देखा है, उसे जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति की गारंटी है। लेकिन कृष्णभावनाभावित भक्त यह भी मानते हैं कि यह मुक्ति (अ पुनर-भव-दर्शनम्) कृष्ण की सेवा करने की खुशी की तुलना में कुछ भी नहीं है।
