vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री बृहत् भागवतामृत
»
खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार
»
अध्याय 5: प्रिय (प्रिय भक्त)
»
श्लोक 81
श्लोक
1.5.81
तद् अस्तु दूरे दौर्भाग्यान्
मम पूर्व-वद् अप्य् असौ
नायात्य् अतो दया कास्य
मन्तव्या मयका मुने
अनुवाद
फिर भी, यह मेरा दुर्भाग्य है कि वे अब यहाँ नहीं आते। तो फिर, हे ऋषिवर, मैं कैसे मान लूँ कि उन्होंने मुझ पर कोई दया की है?
Yet, it is my misfortune that he no longer comes here. So then, O great sage, how can I believe that he has shown me any mercy?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×