श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 5: प्रिय (प्रिय भक्त)  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  1.5.79 
तेन सान्त्वयितव्याहं
हत-बन्धु-जना स्वयम्
श्री-कृष्णेनोपविश्यात्र
मत्-पार्श्वे युक्ति-पाटवैः
 
 
अनुवाद
मेरे परिवार के सदस्यों के मारे जाने के बाद, श्रीकृष्ण स्वयं मेरे पास बैठे और कुशलतापूर्वक मुझे प्रेरक तर्कों से सांत्वना दी।
 
After my family members were killed, Sri Krishna himself sat beside me and skillfully consoled me with persuasive arguments.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)