श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 5: प्रिय (प्रिय भक्त)  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  1.5.73 
किन्त्व् अनेक-महा-यज्ञो-
त्सवं सम्पादयन्न् असौ
स्वी-कारेणाग्र-पूजाया
हर्षयेन् नः कृपा हि सा
 
 
अनुवाद
बल्कि, उसने हमें अपनी सच्ची दया तब दी जब उसने कई महान बलिदानों के उत्सव की व्यवस्था की थी, उसने पहली पूजा स्वीकार करके हमें प्रसन्न किया।
 
Rather, He gave us His true mercy when He had arranged for the celebration of many great sacrifices, He was pleased to accept our first worship.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)