अब हमारे अभक्त शत्रु नष्ट हो गए हैं, हमारा राज्य हमें वापस मिल गया है - और हमारा दुःख पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।
Now our ungodly enemies are destroyed, our kingdom is restored to us – and our sorrow is greater than ever.
तात्पर्य
राजसूय यज्ञ और कुरुक्षेत्र युद्ध के पश्चात जरासंध, शिशुपाल और दुर्योधन सहित उनके सहयोगी सभी मर चुके थे किन्तु वस्तुतः उनका अस्तित्व पूरे अर्थों में "नष्ट" हो चुका था क्योंकि उनको पुनः जन्म लेना नहीं था। और यद्यपि पाण्डवों को दीर्घकाल के दमन के पश्चात शासन करने के लिए मुक्त किया गया, युधिष्ठिर के मत में वे तब अधिक सुखी थे जब एक के पश्चात दूसरे विनाश के खतरे के विरुद्ध संघर्षरत थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥