कयाधु के पुत्र प्रह्लाद को जब भगवान की कृपा प्राप्त हुई, तो वह अपने पौत्र सहित प्राप्त हुए। बंदरों में श्रेष्ठ को ही कृपा प्राप्त हुई थी। परन्तु आप विरले जीवों को अपने समस्त परिजनों और अधीनस्थों सहित भगवान हरि का पूर्ण प्रेम और कृपा प्राप्त हुई है।
When Prahlada, the son of Kayadhu, received the Lord's grace, he received it along with his grandson. Only the best among monkeys received this grace. However, you rare beings, along with all your family members and subordinates, have received the complete love and grace of Lord Hari.
तात्पर्य
यहां नारद, प्रह्लाद और हनुमान के इस दावे की पुष्टि करते हैं कि पाण्डव महान भक्त हैं। हिरण्यकश्यपु के वंशजों में प्रह्लाद के अलावा केवल एकमात्र शुद्ध भक्त उनके पोते बलि थे। हनुमान को ही अपने परिवार में भगवान रामाचंद्र की कृपा प्राप्त हुई, क्योंकि हनुमान आजीवन ब्रह्मचारी थे और इसलिए उनकी कोई संतान नहीं हुई। इसके विपरीत, पाण्डवों ने कृष्ण की कृपा को अपने पूरे परिवार और दल के साथ साझा किया। एक व्याख्या के अनुसार, इस श्लोक में बंधु का अर्थ पाण्डवों के पुत्र, पत्नियाँ और अन्य रिश्तेदार हैं, जबकि स्व-जनाः का अर्थ उनके मंत्री और उनकी राजधानी के निवासी हैं। या, वैकल्पिक रूप से, बंधु का अर्थ विवाह से पाण्डवों के संबंधियों से है, जैसे राजा द्रुपद और राजा विराट, स्वाह का अर्थ उनके रक्त संबंधियों से है, जिसमें दुर्योधन और उसके भाई शामिल हैं, और जनाः का अर्थ उनके नौकरों और नागरिकों से है। किसी भी तरह से, पाण्डवों से जुड़ा हर कोई श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त करता है, जो भगवान के सभी विस्तारों का अत्यंत आकर्षक स्रोत है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥