| श्री बृहत् भागवतामृत » खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार » अध्याय 5: प्रिय (प्रिय भक्त) » श्लोक 106 |
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| | | | श्लोक 1.5.106  | शय्यासनाटनालाप-
क्रीडा-स्नानाशनादिषु
वर्तमाना अपि स्वान् ये
कृष्ण-प्रेम्णा स्मरन्ति न | | | | | | अनुवाद | | खाते, सोते, बैठते, चलते, बोलते, स्नान करते, मनोरंजन करते यदु लोग कृष्ण के प्रति इतने शुद्ध प्रेम में लीन रहते हैं कि वे अपने परिवार और सम्पत्ति को भी भूल जाते हैं। | | | | While eating, sleeping, sitting, walking, talking, bathing, and entertaining themselves, the Yadus are so absorbed in pure love for Krishna that they even forget their families and possessions. | |
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