श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 4: भक्त (भक्त)  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  1.4.95 
किन्तु तेनाधुनाजस्रं
महा-कारुण्य-माधुरी
यथा प्रकाश्यमानास् ते
गम्भीरा पूर्वतो ’धिका
 
 
अनुवाद
परन्तु प्रभु अब असाधारण रूप से तीव्र दया और मधुरता प्रदर्शित कर रहे हैं, जो पहले कभी नहीं दिखाई गई किसी भी चीज़ से अधिक गोपनीय है।
 
But the Lord is now displaying an unusually intense mercy and sweetness, more secret than anything He has ever shown before.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)