श्री हनुमान बोले: हे मुनिश्रेष्ठ, आप ऐसे क्षुद्र के साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं, जो श्री रामचन्द्र के चरणकमलों से विहीन है? मुझे यह याद दिलाकर क्यों रुला रहे हैं कि प्रभु ने मेरी कितनी उपेक्षा की है?
Shri Hanuman said: O great sage, why are you doing this to such a lowly being who is devoid of the lotus feet of Shri Ramachandra? Why are you making me cry by reminding me how much the Lord has neglected me?
तात्पर्य
क्योंकि भगवान रामचंद्र एक इंसान की तरह दो हाथों और दो पैरों वाले दिखाई पड़ते हैं, हम उम्मीद करते हैं कि उनके कमल के पैरों का वर्णन पदम्बुजाभ्यां के दोहरे रूप के बजाय बहुवचन पदम्बुजैः से किया जाएगा। संस्कृत में, बहुवचन रूपों का सामान्यतः दो से अधिक इंगित करने के लिए उपयोग किया जाता है। लेकिन हनुमान यहाँ अपने भगवान के लिए अत्यधिक श्रद्धा में बहुवचन रूप का उपयोग करके काव्य-लाइसेंस नियुक्त करते हैं।
शब्द हीन का अर्थ केवल "रहित" ही नहीं बल्कि "जानबूझकर खारिज किया गया" है। परमानंद के जटिल परिवर्तनों में, हनुमान क्रूर होने के लिए भगवान रामचंद्र को प्यार से फटकारते हैं। तकनीकी रूप से, नैष्ठुर्यम का अर्थ है "हृदय की कठोरता"।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥