श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 4: भक्त (भक्त)  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.4.7 
कृष्णेनाविर्भूय तीरे महाब्धेः
स्वाङ्के कृत्वा लालितो मातृ-वद् यः
ब्रह्मेशादीन् कुर्वतो ’पि स्तवौघं
पद्मां चानादृत्य सम्मानितो यः
 
 
अनुवाद
जब भगवान कृष्ण समुद्र तट पर प्रकट हुए, तो उन्होंने तुम्हें अपनी गोद में बिठाया और माता की तरह दुलार किया। इस प्रकार उन्होंने ब्रह्मा, शिव, अन्य देवताओं की स्तुति और यहाँ तक कि देवी पद्मा की भी उपेक्षा करते हुए तुम्हारा सम्मान किया।
 
When Lord Krishna appeared on the seashore, he placed you on his lap and caressed you like a mother. Thus he honored you, ignoring the praises of Brahma, Shiva, other gods, and even the goddess Padma.
तात्पर्य
हिराण्यकशिपु को मारने के बाद, भगवान नृसिंह अभी भी क्रोधित थे। उन्हें कोई शांत नहीं कर पाया। भगवान के निजी सेवक, जिनका नेतृत्व उनकी पत्नी लक्ष्मी, गरुड़ और ब्रह्मा और अन्य देवता कर रहे थे, थोड़ी दूरी पर खड़े थे, उनके पास आने से बहुत डरते थे। ब्रह्मा ने तब प्रह्लाद से प्रभु को मनाने का प्रयास करने का अनुरोध किया। श्री हरि-भक्ति-सुधोदय (14.13) में भगवान की प्रतिक्रिया का वर्णन किया गया है:

ततः क्षितौ एव निविश्या नाथः

कृत्वा तम् अङ्के स्व-जनैक-बन्धुः

शनैर् विधुन्वन् कर-पल्लवेन

स्पृशन मुहुर् मात्र-वद् आलिलिङ्ग

"भगवान, जो केवल अपने भक्तों के लिए अनुकूल हैं, फिर जमीन पर बैठ गए और प्रह्लाद को अपनी गोद में बिठा लिया। धीरे-धीरे आगे-पीछे हिलते हुए, उन्होंने अपने कमल हाथ से प्रह्लाद को थपथपाया और उन्हें बार-बार गले लगाया जैसे एक माँ अपने बच्चे को गले लगाती है।" इस प्रकार सर्वोच्च प्रभु प्रह्लाद की सेवा में तत्पर रहे, उपस्थित कई अन्य महान व्यक्तियों की उपेक्षा करते हुए।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)