स्व-सैन्य-प्राण-दः श्रीमत्-
सानुज-प्रभु-हर्षकः
गतो वाहनतां भर्तुर्
भक्त्या श्री-लक्ष्मणस्य च
अनुवाद
वे अपने सैनिकों के प्राण थे। अपने दिव्य प्रभु और उनके छोटे भाई लक्ष्मण को सदैव प्रसन्न रखते हुए, वे दोनों के लिए भक्तिपूर्वक वाहक के रूप में सेवा करते थे।
He was the lifeblood of his troops. Always pleased with his divine Lord and his younger brother, Lakshmana, he devotedly served as a carrier for both.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥