यहाँ तक बताए गए हनुमान के कार्य उस श्री रामायण की ऋषिकिंका-कांड और सुंदर-कांड की गाथा से मेल खाते हैं। यहाँ से पाठ 49 के वचन "रक्षो-बल-विनाश-कृत (राक्षस सेना का नाश करने वाले)" से शुरू होकर "सीता-प्रमोदनः (सीता को प्रसन्न करने वाले)" तक, युद्ध-कांड में हनुमान की उपलब्धियों का संक्षेप में वर्णन किया गया है। श्रील सनातन गोस्वामी ने माना कि उनके पाठक वाल्मीकि के रामायण से परिचित होंगे और इसलिए उन्होंने अपनी पुस्तक के आकार को अनावश्यक रूप से बढ़ाने से बचने के लिए इन कहानियों के विवरण छोड़ दिए।
भगवान रामचंद्र की सेना और रावण की सेना के बीच युद्ध के दौरान, रावण के पुत्र इंद्रजीत ने रात के मध्य हमला किया, जादू का सहारा लिया और सभी वानर सैनिकों को बेहोश कर दिया। उस समय श्री लक्ष्मण ने भी ब्रह्मा की भविष्यवाणी को पूरा करने के लिए बेहोश होने का नाटक किया। चिकित्सक सुषेण की सलाह पर, हनुमान जड़ी बूटी विशल्या-करणी को ढूंढने के लिए निकले, जो अकेले ही लक्ष्मण और वानर सैनिकों के जीवन को बचा सकती थी। वह न केवल एक बार बल्कि दो बार गंधमादन पर्वत से जड़ी बूटी लाने में सफल हुए। इस दौरान उन्हें गंधर्वों की सेना को हराना पड़ा, पूरे पहाड़ को उखाड़ना पड़ा क्योंकि वह पहचान नहीं पा रहे थे कि कौन सा पौधा सही है और बहुत देर होने से पहले जल्दी से वापस लौटना पड़ा।
