श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 4: भक्त (भक्त)  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.4.46 
विभीषणार्थ-सम्पादी
रक्षो-बल-विनाश-कृत्
विशल्य-करणी-नामौ-
षौध्य्-आनयन-शक्तिमान्
 
 
अनुवाद
उन्होंने विभीषण की इच्छाएँ पूरी कीं। उन्होंने राक्षसों की सैन्य शक्ति का नाश किया। और उनके पास विशाल्यकरणी नामक औषधि प्रदान करने की विशेष शक्ति थी।
 
He fulfilled Vibhishana's wishes. He destroyed the demons' military might. And he had the special power to provide a medicine called Vishalyakarani.
तात्पर्य
विभीषण, जो कि रावण का भाई था, भगवान रामचंद्र के सेवक बनना चाहता था। हनुमान ने भगवान को विभीषण के साधुओं जैसे व्यवहार के बारे में बता कर विभीषण के लिए आगे का मार्ग प्रशस्त किया। और जब विभीषण ने समुद्र पार किया और अयोध्या की तरफ चल दिया, तो हनुमान ने भगवान से मिलने की व्यवस्था की।

यहाँ तक बताए गए हनुमान के कार्य उस श्री रामायण की ऋषिकिंका-कांड और सुंदर-कांड की गाथा से मेल खाते हैं। यहाँ से पाठ 49 के वचन "रक्षो-बल-विनाश-कृत (राक्षस सेना का नाश करने वाले)" से शुरू होकर "सीता-प्रमोदनः (सीता को प्रसन्न करने वाले)" तक, युद्ध-कांड में हनुमान की उपलब्धियों का संक्षेप में वर्णन किया गया है। श्रील सनातन गोस्वामी ने माना कि उनके पाठक वाल्मीकि के रामायण से परिचित होंगे और इसलिए उन्होंने अपनी पुस्तक के आकार को अनावश्यक रूप से बढ़ाने से बचने के लिए इन कहानियों के विवरण छोड़ दिए।

भगवान रामचंद्र की सेना और रावण की सेना के बीच युद्ध के दौरान, रावण के पुत्र इंद्रजीत ने रात के मध्य हमला किया, जादू का सहारा लिया और सभी वानर सैनिकों को बेहोश कर दिया। उस समय श्री लक्ष्मण ने भी ब्रह्मा की भविष्यवाणी को पूरा करने के लिए बेहोश होने का नाटक किया। चिकित्सक सुषेण की सलाह पर, हनुमान जड़ी बूटी विशल्या-करणी को ढूंढने के लिए निकले, जो अकेले ही लक्ष्मण और वानर सैनिकों के जीवन को बचा सकती थी। वह न केवल एक बार बल्कि दो बार गंधमादन पर्वत से जड़ी बूटी लाने में सफल हुए। इस दौरान उन्हें गंधर्वों की सेना को हराना पड़ा, पूरे पहाड़ को उखाड़ना पड़ा क्योंकि वह पहचान नहीं पा रहे थे कि कौन सा पौधा सही है और बहुत देर होने से पहले जल्दी से वापस लौटना पड़ा।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)