यो बलिष्ठ-तमो बाल्ये
देव-वृन्द-प्रसादतः
सम्प्राप्त-सद्-वर-व्रातो
जरा-मरण-वर्जितः
अनुवाद
वह सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हैं। बचपन में ही देवताओं ने उन्हें अनेक अद्भुत वरदान दिए थे। इस प्रकार वे वृद्धावस्था और मृत्यु से मुक्त हो गए।
He is the most powerful being. The gods granted him many wonderful boons in his childhood. Thus, he became free from old age and death.
तात्पर्य
इस श्लोक में हनुमान के अद्वितीय बल और उनके अन्य गुणों का वर्णन उनकी भगवान रामचंद्र की निस्वार्थ सेवा को बढ़ावा देता है। उन्हें देवताओं का आशीर्वाद कैसे प्राप्त हुआ इसका वर्णन श्री रामयाण (उत्तर-कांड 35-36) में किया गया है। जैसे ही हनुमान का जन्म हुआ, उन्होंने अपने सिर पर सूर्य को उगते हुए देखा और उसे पेड़ से लटके हुए किसी पके फल के रूप में समझ लिया। वे उसे पकड़ने के लिए ऊपर की ओर कूदे और ऐसा ही करते भी अगर इंद्र ने सूर्य की रक्षा करने वाले वज्रायुध को नहीं चलाया होता, जिसने हनुमान के जबड़े पर वार किया और उन्हें पृथ्वी पर बेहोश कर दिया। हनुमान के पिता, वायु, बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने पूरे ब्रह्मांड में साँस की शक्ति रोकने का फैसला किया और ब्रह्मांड के सभी निवासियों का दम घुटने लगा। सार्वभौमिक जनसंख्या को बचाने के लिए, ब्रह्मा और अन्य मुख्य देवता हनुमान के पास आए, उन्हें पुनर्जीवित किया और उन्हें विभिन्न आशीर्वाद प्रदान किए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥