श्री प्रह्लाद ने कहा: हे प्रभु और गुरुवर, कृपया अपनी कही हुई हर बात पर पुनर्विचार करें। एक छोटा बालक कृष्ण की भक्ति के विज्ञान को ठीक से समझ ही नहीं सकता।
Sri Prahlada said, "O Lord and Guru, please reconsider everything you have said. A small child cannot properly understand the science of devotion to Krishna."
तात्पर्य
भक्ति सेवा के उचित निष्पादन के लिए परिपक्व समझ की आवश्यकता होती है, क्योंकि भक्ति-योग केवल एक बाहरी साधना ही नहीं है बल्कि स्वयं की समस्त शक्तियों का स्वाभाविक उपयोग है। एक सामान्य नियम है कि बुद्धिमान विवेक के जागरण से पूर्व छोटे बच्चे भक्ति सेवा में संलग्न होने के लिए आवश्यक समझ नहीं रख पाते हैं। ऋषियों और संत भक्तों के उच्च संस्कृति वाले परिवारों में व्यक्तिगत अपवाद हो सकते हैं, लेकिन प्रह्लाद, खुद को एक असभ्य दानव मानते हुए, शायद ही खुद को ऐसा अपवाद बताएँगे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥