श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 4: भक्त (भक्त)  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  1.4.106 
यदा च मां कम् अप्य् अर्थम्
उद्दिश्य प्रभुर् आह्वयेत्
महानुकम्पया किञ्चिद्
दातुं सेवा-सुखं परम्
 
 
अनुवाद
और जब कभी भगवान मुझे किसी उद्देश्य से बुलाते हैं, तो अपनी महान दया से वे मुझे उनकी सेवा करने का दिव्य सुख प्रदान करते हैं।
 
And whenever God calls me for some purpose, in His great mercy He grants me the divine pleasure of serving Him.
तात्पर्य
"यदि प्रभु इच्छा करें, तो मैं इधर-उधर जाऊँगा।" हनुमान को किम्पुरुष-लोक में रहने की आवश्यकता है ताकि भगवान रामचंद्र के किसी भी विशेष अनुरोध का उत्तर देने के लिए तैयार रहा जा सके। और अगर श्री कृष्ण अपने अतीत में हनुमान को सहायता के लिए कृपा करके बुलाते हैं - उदाहरण के लिए, कौरव सैनिकों को डराने के लिए कुरुक्षेत्र युद्ध के मैदान में प्रकट होने के लिए - तो हनुमान, निश्चित रूप से, तुरंत हस्तिनापुर या द्वारका पहुँचेंगे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)