नाथ योनि-सहस्रेषु
येषु येषु व्रजाम्यहं
तेषु तेषु अच्युता भक्ति
अच्युतास्तु सदा त्वयी
"हे स्वामी, मुझे इस दुनिया में जितने भी जन्म लेने हैं, हजारों जन्मों में मुझे आपके प्रति अटूट भक्ति प्रदान करें, अविनाशी भगवान।" प्रह्लाद के हजारों बार जन्म लेने की इच्छा बताती है कि उन्हें मुक्ति में कोई रुचि नहीं है।
