परन्तु वैकुंठ में भक्तजन सदैव भगवान के सान्निध्य में आनंदमय लीलाओं का आनंद लेते हैं। इसलिए भक्तगण कभी-कभी वहाँ निवास करना पसंद करते हैं।
But in Vaikuntha, devotees always enjoy the blissful pastimes in the presence of the Lord. Therefore, devotees sometimes prefer to reside there.
तात्पर्य
इस तरह से केवल वैकुण्ठ और उसके निवासियों की ही प्रशंसा क्यों की जानी चाहिए, जबकि पृथ्वी पर विष्णु के भक्तों का भी यही वैभव है। क्योंकि यहाँ पर पृथ्वी पर शुद्ध वैष्णव भक्तिपूर्ण सेवा के महिमा के प्रकटीकरण करते हैं, केवल वैकुण्ठ में ही भक्त भाग्य की देवी के पति के साथ-साथ असीम उन्मादपूर्ण लीलाओं में शामिल होते हैं। प्रेमपूर्ण व्यवहार केवल वैकुण्ठ में ही देखने को मिलता है, कहीं और नहीं। इसी कारण वैकुण्ठ को उसका नाम प्राप्त हुआ है। वह संसार है जहाँ अपने को भक्ति रस के निरंतर प्रवाह का अनुभव न करने की चिंता (कुण्ठता) किसी को भी कभी महसूस नहीं होती। जब वैकुण्ठ की भक्त भगवन के व्यक्तित्व से बाह्य या आंतरिक दृष्टि से कुछ पलों के लिए दूर होते हैं तो उनका ऐसा प्रतीत होना भी उनके उत्साह को बढ़ाने में ही मदद करता है और वे भगवान को देखने और उनके साथ लुत्फ लेने के लिए और भी उत्सुक हो जाते हैं। वैकुण्ठ में बी भगवान की अनुपस्थिति भी उनके भक्तों के लिए भगवान के प्रति जागरूकता और रस के आनंद को बढ़ाती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥