वैकुंठ-वासी अलौकिक होते हैं और इसी प्रकार उनकी बाहरी संपन्नताएं भी होती हैं। प्रत्येक निवासी में लाखों भौतिक ब्रह्मांडों और उनके आवरण रूपी खोलों में उपलब्ध शक्ति और संपत्ति से कहीं अधिक शक्ति और संपत्ति होती है। वैकुंठ-वासी बिना किसी प्रयास और बिना किसी सीमा की प्राप्ति करते हैं, ये संपन्नताएं आध्यात्मिक, शाश्वत और बिल्कुल वास्तविक हैं। ये परम भगवान की दिव्य ऊर्जा का विस्तार हैं और इसलिए ये सभी अत्यंत अभीष्ट और विविधता से भरी हुई हैं। इस तथ्य के तार्किक और शास्त्रीय प्रमाण श्री ब्रह्द-भागवत अमृत में आगे प्रस्तुत किये जाएँगे।
