श्री महेश बोले: ओह, यह कितना दुःखद है! हे नारद! हे मिथ्या अभिमान से रहित, तुम मुझ अभिमान के मूल की तुलना अभिमानरहित मुनियों के स्वामी कृष्ण से कैसे कर सकते हो?
Lord Mahesh said: Oh, how sad this is! O Narada! O one without false pride, how can you compare me, the source of pride, with Krishna, the lord of the sages without pride?
तात्पर्य
भगवान शिव अहंकार की भौतिक शक्ति का निरीक्षण करते हैं, जिसके द्वारा ग्रहों के शासकों से लेकर हर कोई खुद को बहुत महत्वपूर्ण समझता है। और इसलिए भौतिक ब्रह्मांड में प्रचलित झूठे अहंकार के लिए भगवान शिव के पास खुद को दोष देने का एक कारण है। इसके विपरीत, नारद अहंकार के प्रभाव से मुक्त हैं और इसलिए भगवान शिव की मूर्ति पूजा नहीं करनी चाहिए। अहंकार के स्पेक्ट्रम में भगवान शिव के विपरीत छोर पर, भगवान कृष्ण शुद्ध अभिमानहीनता के स्रोत हैं। भगवान शिव इस तुलना से यह संकेत देते हैं कि प्रकृति में इतने विपरीत होने के कारण उनके और भगवान कृष्ण के बीच कोई वास्तविक संबंध नहीं हो सकता।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥