श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 3: प्रपञ्चातीत (भौतिकता से परे)  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.3.32 
पार्वत्याश् च प्रसादेन
बहवस् तत्-प्रियाः कृताः
तत्त्वाभिज्ञा विशेषेण
भवतोर् इयम् एव हि
 
 
अनुवाद
माता पार्वती की कृपा से और भी अनेक व्यक्ति भगवान कृष्ण के प्रिय हो गए हैं। वे भगवान कृष्ण और आपके वास्तविक स्वरूप को विस्तार से जानती हैं।
 
By the grace of Mother Parvati, many other people have become dear to Lord Krishna. They know Lord Krishna and your true nature in detail.
तात्पर्य
पुराणों में जनाशर्मा जैसे व्यक्तियों की चर्चा है जिन्हें पार्वती की कृपा से महान वैष्णवों में से एक बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जनाशर्मा की कहानी, श्री बृहद् भगवतामृत के दूसरे भाग में दी जाएगी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)