चतुर्वा अस्य भुजा शिष्टा भविषयत्य जररामरः
पार्षद मुख्या भवतो न कुतश्चित भयो असुरः
"अभी भी जिसके पास चार भुजाएँ हैं, वह राक्षस जरा और मृत्यु से मुक्त होगा, और वह आपके प्रमुख सेवकों में से एक बनेगा। इस प्रकार उसे किसी भी कारण से कुछ भी भय नहीं होगा" ( भागवतम 10.63.49)
