श्री-नारद उवाच
नापराधावकाशस् ते
प्रेयसः कश्चिद् अच्युते
कदाचिल् लोक-दृष्ट्यापि
जातो नास्मिन् प्रकाशते
अनुवाद
श्री नारद बोले: आप भगवान अच्युत के इतने प्रिय हैं। क्या यह संभव है कि आप कभी उनका अपमान कर सकें? यद्यपि लोग कभी-कभी आपके अपराधों को देख लेते हैं, परन्तु भगवान उन्हें कभी नहीं देखते।
Sri Narada said: You are so dear to Lord Acyuta. Is it possible that you could ever offend him? Although people sometimes see your transgressions, the Lord never sees them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥