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श्लोक 1.3.15  |
कति वारांश् च कृष्णेन
वरा विविध-मूर्तिभिः
भक्त्या भवन्तम् आराध्य
गृहीताः कति सन्ति न |
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| अनुवाद |
| क्या कृष्ण ने अपने विभिन्न अवतारों में अनेक बार आपकी पूजा नहीं की है और आपसे अनेक वरदान नहीं लिए हैं? |
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| Has not Krishna worshipped you many times in his various incarnations and received many boons from you? |
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